Cinema Vs. OTT: Challenges of the Indian Film Industry

सिनेमा भारत में जीवन के तनाव की सख्त धूप से बचने वाला घने बादल का टुकड़ा है। स्याह अँधेरे में जब रौशनी के बादल छाते हैं, ये उल्लास का सामाजिक उत्सव हो जाता है। थिएटर में फिल्म देखना सिर्फ फिल्म नहीं बल्कि एक सम्पूर्ण अनुभव है जिसमे सैकड़ों लोगों की सम्मिलित प्रतिक्रिया, हर दृश्य को जीवंत कर देती है। जहाँ हर दर्शक, हर तालियाँ, हर भाव एक साझा लय रचती हैं। मगर अब यही जादू इंडिया India में Cinema & OTT के challenges की आँधी में अपने मायने तलाश रहा है।

Cinema vs OTT challenges of India

सिनेमा भारत में भावनात्मक स्तर पर लोगों को जोड़ देता है। थिएटर में चल रहे एक ही दृश्य पर सैकड़ों लोग मुस्कुरा देते हैं या रुंधे गले से हिचकियां लेते सुनाई दे जाएंगे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से ३ घंटे के लिए दर्शकों को अलग लोक में ले जाने वाली इस प्रक्रिया पर कई चुनौतियां आन पड़ी हैं।

फिल्म निर्माण की बदलती प्रक्रिया

वर्तमान समय में फिल्म निर्माण की प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक जटिल और महंगी हो गई है। बढ़ती लागत, तकनीकी अपेक्षाओं में वृद्धि, और स्टार कास्ट की व्यस्त शेड्यूल के कारण शूटिंग की योजना बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। अक्षय कुमार, कार्तिक आर्यन, आलिया भट्ट, कटरीना कैफ, आमिर खान जैसे बड़े कलाकारों की कई फिल्मों के साथ व्यस्तता के कारण एक ही फिल्म की शूटिंग महीनों तक खिंच जाती है। ये सभी स्थितियां, सिनेमा जैसे बड़े उद्योग और मनोरंजन से इतर, एक ज़रूरत की कमर तोड़ने को काफी हैं।

भारत में सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 2024 में 88.6 करोड़ तक पहुँच गई थी, और अनुमान था कि 2025 तक यह 90 करोड़ का आंकड़ा पार कर जाएगी, जो वर्ष-दर-वर्ष लगभग 8 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। देश की कुल इंटरनेट जनसंख्या में ग्रामीण भारत की हिस्सेदारी लगभग 55 प्रतिशत है, यानी करीब 48.8 करोड़ उपयोगकर्ता — यह स्पष्ट संकेत है कि भारत की डिजिटल प्रगति का असली इंजन अब ग्रामीण क्षेत्र भी बन चुके हैं। (Source: DD News)

OTT का बढ़ता दबाव

एक तरफ जहां बढ़ती लागत और शूटिंग की चुनौतियां फिल्म निर्माण को प्रभावित कर रही हैं, वहीं बनी हुई करोड़ों की फिल्में, थिएट्रिकल रिलीज़ से घबरा रही हैं। OTT प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव और दर्शकों की बदलती आदतों ने थिएटर रिलीज़ को अनिश्चित बना दिया है। पिछले कुछ समय में कई बड़े प्रोड्यूसर्स अपनी फिल्मों को सीधे OTT पर रिलीज़ करने को मजबूर हुए हैं। कुछ बड़ी फिल्में जो थिएटर रिलीज़ के लिए तैयार थीं, उन्हें भी रिलीज़ की तारीख बार-बार टालनी पड़ी है या फिर OTT का रास्ता अपनाना पड़ा है।

मल्टीप्लेक्स और सिंगल थिएटर्स की मुश्किलें

देश के ज़्यादातर मल्टीप्लेक्स और सिंगल थिएटर्स को दर्शकों की कम संख्या, बढ़ती परिचालन लागत, और OTT की प्रतिस्पर्धा के कारण गंभीर वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। बिजली के बिल, स्टाफ का वेतन, और मेंटेनेंस की लागत लगातार बढ़ रही है जबकि दर्शकों की संख्या घट रही है।

रेड कार्पेट मूविंग पिक्चर्स के फाउंडर और पार्टनर संजय भूटियानी के अनुसार, “आने वाली स्थिति बेहद मुश्किल भरी है। घटते दर्शकों और बढ़ती लागत से मल्टीप्लेक्स और सिंगल थिएटर ओनर, दोनों के लिए बेहद मुश्किल वक़्त है और शायद कई थिएटर दोबारा कभी ओपन भी न हो पाएं, इसकी संभावना बहुत ज़्यादा है। नए कंटेंट का अभाव और OTT की मजबूत पकड़ के कारण सिनेमा हॉल्स का व्यवसाय मॉडल ही खतरे में है। संजय ने ये भी बताया कि बड़े बजट की फिल्मों के लिए कास्ट और क्रू की डेट को मैच करना प्रोड्यूसर्स के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होता है।”

वित्तीय नुकसान और सरकारी उदासीनता

नॉर्थ इंडिया के प्रसिद्ध फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर राज बंसल का कहना है कि फिल्म इंडस्ट्री को वित्तीय संकट का सबसे ज़्यादा सामना करना पड़ रहा है और सरकार की तरफ से न टैक्स में कोई रिलैक्सेशन है और न ही कोई राहत या पैकेज सरकार थिएटर ओनर को दे रही है। राज बंसल के अनुसार, हिंदी फिल्म इंडस्ट्री, रीजनल इंडस्ट्री और हॉलीवुड की फिल्म रिलीज़ को मिलाकर लगभग हज़ारों करोड़ का वार्षिक घाटा हो रहा है। राज बंसल के अनुसार, “मनोरंजन उद्योग को सरकार गंभीरता से नहीं ले रही है। GST की ऊंची दरें, प्रॉपर्टी टैक्स, और अन्य शुल्कों के बोझ तले थिएटर मालिक दब रहे हैं।”

Cinema vs OTT challenges of India

फिल्म हॉल्स का घटता व्यवसाय, बढ़ती निर्माण लागत, OTT की बढ़ती प्रतिस्पर्धा, और दर्शकों की बदलती प्राथमिकताएं – ये सब सिनेमा और विजुअल कंटेंट क्रिएट करने वाली इंडस्ट्री पर गंभीर प्रभाव डाल रहे हैं, ये तो परिलक्षित है। देखना ये भी होगा कि बदलते समय में इंडस्ट्री अपने आपको कैसे इस विषम परिस्थिति में ढालती है और नए व्यवसाय मॉडल्स के साथ कैसे आगे बढ़ती है।

थिएट्रिकल अनुभव की अनूठी अपील को बचाए रखते हुए, टेक्नोलॉजी और नए प्लेटफॉर्म्स के साथ तालमेल बिठाना ही भारतीय सिनेमा उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।

OTT Review about latest Series- BARAMULA- Click Here


Discover more from Total Filmy

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply

Discover more from Total Filmy

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading